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India News: जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में रुचिका सिंह पर जीरो FIR, CJP ने कार्रवाई को बताया अनुचित

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जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में रुचिका सिंह पर जीरो FIR दर्ज की गई। मामला संसद मार्ग थाने भेजा गया, जबकि CJP और विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

नई दिल्ली, 1 अगस्त।जंतर-मंतर पर 23 जुलाई को हुए प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर एक युवती के विरुद्ध जीरो एफआईआर दर्ज होने के बाद राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। शिकायत के आधार पर दर्ज मामले को अब संबंधित क्षेत्राधिकार वाले संसद मार्ग थाने को भेज दिया गया है, जहां आगे की जांच की जाएगी।

पुलिस सूत्रों के अनुसार शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस प्रकार की टिप्पणी से संवैधानिक पद की गरिमा प्रभावित हुई और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका उत्पन्न हुई।

मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। चूंकि शिकायत जिस थाने में दर्ज कराई गई वह घटना स्थल के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था, इसलिए पहले जीरो एफआईआर दर्ज की गई और बाद में उसे दिल्ली पुलिस के संसद मार्ग थाने को स्थानांतरित कर दिया गया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अब संबंधित थाना उपलब्ध साक्ष्यों, वीडियो फुटेज और अन्य तथ्यों के आधार पर आगे की जांच करेगा। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इधर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की भाषा आपत्तिजनक रही है तो उसके लिए मानहानि जैसे कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन केवल कथित अपशब्दों के आधार पर आपराधिक कानून का इस्तेमाल उचित नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने पुलिस से संयम बरतने और कानून का निष्पक्ष उपयोग करने की अपील की।

विपक्ष की ओर से भी इस मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई है। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि एक युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ सरकारी मशीनरी का इस प्रकार उपयोग लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े करता है।

इस बीच हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर सहित विभिन्न राज्यों में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान कहा था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बिना उचित आधार के कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जिन लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड है, उन्हें इस राहत का लाभ नहीं मिलेगा। अदालत ने पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर भी टिप्पणी की थी और स्वतंत्र जांच व्यवस्था पर विचार करने के संकेत दिए थे।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जीरो एफआईआर व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी पीड़ित या शिकायतकर्ता को केवल क्षेत्राधिकार के कारण शिकायत दर्ज कराने में कठिनाई न हो। बाद में मामला संबंधित थाने को भेजकर नियमित जांच कराई जाती है।

अब इस पूरे प्रकरण में सभी की नजर संसद मार्ग थाना पुलिस की जांच पर टिकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो, शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।

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विशेष टिप्पणी

लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक पदों की गरिमा—दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। यदि किसी प्रदर्शन में आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग हुआ है तो कानून अपना काम करेगा, लेकिन यह भी आवश्यक है कि जांच निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित हो। ऐसे मामलों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अधिक महत्वपूर्ण न्यायिक प्रक्रिया और निष्पक्ष जांच होती है, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं पर जनता का विश्वास बना रहे।

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